Posts

मैं पागल हूं

मैं पागल हूं, क्योंकि मैं, मैं हूँ। नहीं भाता मुझे अजनबियों का करीब आना, कुछ अपनों का यूं बे वजह रूठ जाना।  मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता इन रूठे लोगों को मनाना।  नहीं भाता मुझे आंसुओं का यूं लुढ़क जाना, होठों का यूं हर वक्त मुस्कुरा जाना।  मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता अपने गुस्से को छुपाना।  नहीं भाता मुझे रिश्तों का एक पल में बिखर जाना, हमारी हँसी का चंद लम्हो में सिमट कर रह जाना।  मैं पागल ही तो हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता हर स्थिति को सहन कर जाना। मुझे नहीं भाता सपनो का टूट जाना, योजनाओं का बस एक योजना ही बन कर रह जाना। मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता अपने सपनो को अधूरा देख पाना।  नहीं भाता मुझे किसी का कुछ भी कह देना, मेरी बातों को बस यूं ही टाल दिया जाना।  मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता हर किसी की सुनकर चुप रह जाना। 

मां का दूध ही सबसे अच्छा, करे बच्चे की हर बीमारी से रक्षा

Image
दुनिया भर में स्तनपान को बढ़ावा देने और लोगों तक इसके महत्व की जानकारी पहुंचाने के लिए हर साल एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। हर साल विश्व स्तनपान दिवस पर एक खास थीम तैयार की जाती है, जिसके अनुसार ही उस पर बात होती है। हर साल स्तनपान सप्ताह पर दी जाने वाली जानकारियों का ही नतीजा है कि आज अस्पतालों में भी हर नई मां को इससे जुड़ी हर जानकारी देने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही हर साल बच्चों को नियमित रूप से स्तनपान करवाने वाली माताओं के आकड़ों में वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर बच्चे को अमूमन दो साल तक मां के दूध का सेवन करना चाहिए। ऐसे हुई शुरुआत : स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए 1991 में 1990 की एक घोषणा पर कार्रवाई करने के लिए विश्व एलायंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन (वाबा) का गठन किया गया था। स्तनपान के प्रचार के लिए वाबा द्वारा वैश्विक एकीकृत स्तनपान रणनीति तैयार की गई। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर से एक दिन चुनने का सुझाव दिया गया। हालांकि बाद में इसे एक दिन न कर के एक सप्ताह के रूप में मनाने का निश्चय किया गया। विश्व में 1992 में पहला...

अनपढ़ है मेरी माँ

Image
अनपढ़ है मेरी माँ, पर समय को पढ़ना जानती है, खराब समय को भी वह अच्छे से गढ़ना जानती है।  मन की टुक-टुक और मस्तिष्क की टिक-टिक को भी पढ़ लेती है। माँ अनपढ़ है मेरी, न जाने ये सब कैसे कर लेती है। वो गणित में मेरा जोड़-घटाना और अंग्रेजी में शब्दों का भूल जाना माँ बखूबी समझती है। खुद अनपढ़ हो कर भी मुझे हर वक्त पढ़ने को कहती है। मेरी परिक्षा की तिथि हो या मेरे किसी ज़रूरी काम की, मुझसे पहले माँ को याद आती है। मेरी माँ अनपढ़ है, फिर भी वह हर तिथि दिमाग में लिख लेती है।  मेरी चिकित्सक, मेरी सलाहकार है, माँ अनपढ़ ज़रूर है मेरी पर उसे पढ़े-लिखों से भी अधिक ज्ञान है।

बावरा मन

आज मन बड़ा उदास है, न जाने इसे किस बात की आस है।  न रोता है न ही चैन से सोता है, खुदा जाने ये क्या-क्या खुद में ही संजोता है।  शायद आज मन में उभरा कोई अनकहा इतिहास है या इसमें रूठे रिश्तों की कोई फरियाद है।  आज मन में एक अजीब सी कसक है, शायद यह अधूरे ख्वाबों की सिसक है।  रूठ जाता है यह अपनों को मनाने में, टूट जाता है यह फासले बढ़ाने में। यह कोमल सा मन हो जाता है कठोर, जब नहीं मिलता इसे अपने प्रश्नों का कोई ओर-छोर।  न जाने क्यों रहता है ये आजकल खफा, हर दफा, कुछ भी नहीं है कहता, बस हर वक्त सहता ही रहता। खोया-खोया सा है, आज मन कुछ रोया-रोया सा है। 

चुप्पी

Image
चुप - चुप से रहते हो, बताओं ना क्यों कुछ नहीं कहते हो मेरी हर खुशी, हर गम को इत्मीनान से सुनते हो, फिर क्यों कभी अपनी नहीं कहते हो? माना हम हैं तुम्हारे और तुम भी हो हमारे, फिर भी न जाने क्यों आज लगता है कि जुदा हैं हमारे किनारे। तुमने ही तो सिखाया था मुझे अपने मन की कहना, फिर तुमने कब से शुरू कर दिया यूं चुपचाप रहना। तुम्हारी खामोशी से सहम गई हूं, मैं अब तुम्हारे कुछ कहने के  इंतजार में ठहर गई हूं। चुपचाप से आना और अपनी चुप्पी तोड़ लाना, आते हुए मेरे सवालों के जवाब ढूढ़ लाना। कह देना दिल की बातें और हो जाना बेबाक , क्योंकि तुम्हें सुने बिना धड़कनें रहने लगी हैं उदास । मेरे मन के जख्मों का मरहम बन जाना, इस बार आना तो वापस फिर न जाना।

तन्हाई

Image
तन्हाइयों को नहीं  पसंद   तन्हाई ,  आज  उन्होंने मुझे ये  अजीब  सी  बात   बताई । कभी तकिये को भीगोना, कभी बीते लम्हों को पिरोना, तन्हाइयों को नहीं भाता लोगों का  इस   तरह  दुखों को संजोना।

अब खुल कर मुस्करा रही है पृथ्वी

Image
लॉकडाउन के बाद देश के हर क्षेत्र में प्रदूषण पूरी तरह समाप्त हो गया। अब यहां की नदियों में स्वच्छ - निर्मल पानी है, हवा में मिट्टी का सौंधा पन है और आकाश हंस के समान सफेद है। अब सड़कों पर भी सिर्फ उड़ते हुए पत्ते ही दिखते हैं, उनके साथ उड़ती पन्नियां नहीं। अब घर के बगीचे में चिड़ियों की चहचहाहट अधिक सुनाई देती है, साथ ही अब सुबह के सूरज का तेज भी शीतल लगता है। ठीक से सोचने पर भी आसपास का ऐसा कोई साल याद नहीं आया जब अखबार में देश में बढ़ते प्रदूषण की कोई खबर न आई हो। पर आज हालात इतने सुधर गए कि पत्रकारों की कलम चाह कर भी देश के वातावरण की आलोचना नहीं कर पा रही है। बचपन में सुना था कि पृथ्वी हम मनुष्यों का घर है, पर अब यह सत्य एक अनकहे झूठ सा लगता है। क्योंकि कुछ समय पहले तक पृथ्वी का हाल देख कर यह घर जैसी तो बिल्कुल नहीं लगती थी। ऐसा इसलिए , क्योंकि मनुष्य के ईंट और चूने से बने मकानों में तो कचरे का ढेर नहीं दिखता है और ना ही इन मकानों में सीवेज की दुर्गंध आती है। हम सब हमेशा से अपने मकानों की स्वच्छत...

हां! पुरुष भी होते हैं प्रताणना का शिकार

वॉट वुमन वांट?  इस प्रश्न का उत्तर शायद ही दुनिया के किसी पुरुष के पास हो। अगर ढूंढ़ा जाए तो शायद कुछ ऐसी महिलाएं भी मिल जाए जो यह न बता पाए कि असल में महिलाओं और लड़कियों को क्या चाहिए। खैर... यह चर्चा इसलिए, क्योंकि कुछ रोज पहले एक ऐसा मामला मुझे खबरों में पढ़ने को मिला, जिसने मुझे भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि असल में महिलाओं को क्या चाहिए? दरसल, # boyslockerroom मामले में हालही में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि जिस वॉयरल चैट को लेकर हम सब लड़कों की मानसिकता पर सवाल उठा रहे थे, वह चैट असल में एक नाबालिग लड़की द्वारा लड़के की फेक आईडी बना कर की गई थी। पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने पर लड़की ने बताया कि, उसने ऐसा अपने बॉयफ्रेंड का लड़कियों के प्रति नजरिया जानने के लिए किया। बताईये भला, जिसपर विश्वास कर बॉयफ्रेंड बनाया उसके नजरिये पर ही शक हो गया। वैसे किसी का लड़कियों के प्रति नजरिया जानने का यह तरीका वाकई हैरान करता है। ऐतराज फिल्म का एक डॉयलाग है कि, "जब कोई मर्द किसी लड़की को थप्पड़ मारता है, तो हम कहते हैं कि बड़ा ही जालिम मर्द है। और जब कोई औरत किसी मर्द को...

'वॉयरल सोच', शुरुआत अब नहीं तो कब?

Image
# Boislockerroom  ये हैशटैग आजकल सोशल मीडिया पर काफी  ट्रेंड कर रहा है। खबरों की माने तो यह इंस्टाग्राम पर बनाए गए एक ग्रुप का नाम है। इसके ट्रेंड होने की मुख्य वजह ग्रुप से जुड़े लड़कों के बीच होने वाली बातचीत है, जिसमें वह धड़ल्ले से लड़कियों व उनके अंगों पर अभद्र टिप्पणियां करते देखे जा रहे हैं। ग्रुप में होने वाली अश्लील बातों से आहत एक लड़की ने लड़कों की इस चैट को ट्वीटर पर शेयर कर दिया, जिसके बाद मामला पुलिस व मीडिया के सामने आ सका। वहीं लड़की के इस तरह चैट सार्वजनिक करने से बौखलाए लड़के इस कदर आहत हुए कि उन्होंने कुछ लड़कियों की नग्न तस्वीरें सार्वजनिक करने का फैसला कर लिया। हालांकि ऐसा होने से पहले ही लड़कों की यह चैट भी वॉयरल हो गई । जानकारों के अनुसार यह ग्रुप दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाले लड़कों का है।     इस दौरान दिल्ली के ही कुछ अन्य लड़कों के स्नैपटैच ग्रुप की चैट भी सामने आई , जिसमें लड़कों द्वारा किसी लड़की का गैंगरेप करने पर चर्चा की जा रही है। इस ग्रुप की चैट द...

अवध की छत

Image
अवध की शाम में फिर वही बात हो गई, बड़ी मुद्दतों बाद उनसे छत पर मुलाकात हो गई। 💖 अवध की ये 'शाम' फिर से गुलज़ार हो गई, क्योंकि यहां तन्हाईयाँ तमाम हो गईं।💔 फिर से बीतने लगीं छतों पर लोगों की शामें, टहलने के बहाने ही सही, याद आए गुजरे जमाने।💝 बरसों पहले जिसे भूल गया था जमाना, वही बन गया आज सबका फ़साना।💓 अवध की छतें फिर पतंगों से सराबोर हो गईं, क्योंकि लोगों में फिर से पेचें लड़ाने की होड़ हो गई।💞

दिल से, दिल को

Image
हमारी शुरुआत ही खटास के साथ हुई, इसलिए मैंने तुमसे मिठास की उम्मीद ही न की। फिर भी जाने अनजाने तुमने मुझे कई बार हंसाया और इसी तरह तुमने मेरा हर दिन बनाया। कई अहम सबक भी सिखाए हैं तुमने, पहले से अधिक द्रढ़ बनाया और इसी तरह तुम रहे हमेशा बनकर मेरा साया। पहली मुलाकात में ही चिढ़ गई थी तुमसे, फिर भी तुमने मेरे साथ ही हर कदम बढ़ाया। मेरे सही, गलत और सही करने के बाद गलत फैसले लेने को भी तुमने सराहा और इस तरह तुमने मेरे मुताबिक ही माहौल बना डाला। एक दिन सोचा कि क्या सही थी हमारी शुरुआत, क्यों नहीं की मैने तुमसे कभी कोई बात? वैसे अब तो कभी न मिलेगा मुझे तुम्हारा साथ और न ही आओगे तुम फिर कभी थामने मेरा हाथ, रोक भी नहीं सकतें तुम्हें, न ही पलट सकतें हैं हम घड़ी का कांटा, इसलिए दिल से कह रहे हैं तुम्हें टाटा।  अलविदा 2019...!

आकांक्षा

शुरू से शुरू करूं तो शायद शुरू ही न कर पाऊं, ये मेरे दिल का हाल है... मैं खुद इसे दुनिया से रुबरू ही न करा पाऊं। देखे थे जो ख्वाब अनेक अब तो वो यादों में बस गए, जिन गुलाब का गुलदस्ता बनाने की सोची थी, वो तो पहली पतझड़ में ही झड़ गए। प्लान 'ए' के बनते ही प्लान 'बी' और 'सी' भी बना लिया करती थी... प्लान 'ए' के टूटते ही 'बी' और 'सी' तो किसी अंजान बस्ते में गुम गए। हुई थी निराश अपने आप से, फटकारा भी था खुद को जरा सा, अपनों और सपनों के बीच, हो गई थी अकेली मानों हो एक पहेली। मन था उदास, मस्तिष्क था निराश... लगने लगा था ये जहां खाली-खाली, क्योंकि पाल ली थी मैंने मन में हारी एक नारी। हां भूल गई थी मैं कि ये नारी ही है जो कभी नहीं है हारी। आज फिर से जनूगी एक आकांक्षा के साथ नई आकांक्षा, प्लान 'ए' के साथ प्लान 'बी' और 'सी' फिर से बनाऊंगी... इसके बाद ही अपने दिल का हाल दुनिया को सुनाऊंगी। 

प्रधानमंत्री जी की 'रेड कार्पेट' वाली तीर्थ यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उत्तराखंड की दो दिवसीय यात्रा पर केदारनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और इसके बाद वह दो किलोमीटर तक की चढ़ाई करके रुद्र गुफा में पहुंचे। बताया गया कि इस गुफा में प्रधानमंत्री रविवार तक ध्यान लगाएंगे। वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ में यह तीसरा दौरा है, पर मीडिया में पिछले दो दौरों से अधिक चर्चा इस दौरे की हो रही है। जाहिर है कि लोग इसे आने वाले चुनाव परिणाम के लिए की जाने वाली प्रार्थना के रूप में देख रहे होंगे। लोगों का अनुमान भी कहीं न कहीं सही है, मगर क्या वाकई यह सिर्फ प्रार्थना है जो प्रधानमंत्री मोदी को केदारनाथ की गला देने वाली पहाड़ियों तक खींच ले गई। यह प्रश्न किसी के मन में उठे या न उठे, पर मोदी विरोधियों के मन में जरूर उठेगा। और इस बार मेरे मन में भी।     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को श्रद्धा न मान कर ढोंग, टीआरपी वाला दौरा और खुद को भगवान शिव का परम भक्त दिखा कर हिंदुओं का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला एक नया कदम मानना मेरे हिसाब से बिल्कुल भी गलत नहीं है। इस बात का प्रमाण खुद नरेंद्र मोदी...

गणिकाओं के लिए इतना भेदभाव क्यों?

देश के प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू हालही में मुंबई के कमाठीपुरा इलाके पहुंचे। कमाठीपुरा यह मुबंई जैसे खूखसूरत और प्रसिद्ध शहर के सबसे बदनाम इलाकों में से एक है। आम भाषा में इसे लाल बाजार या रेड लाइट एरिया कहते हैं। और आसान शब्दों में कहें तो यह वह इलाका का जहां हर रोज लगभग हर वो काम होता है, जिसे करने की इजाजत हमारा समाज हमें नहीं देता। यह यूं कहें कि जिन्हें करने की इजाजत शरीफ घर के लोगों को नहीं होती।     यह सब सुन कर अखबारों और न्यूज चैनलों से दूर रहने वाले लोगों को अधिक हैरानी होगी। हैरानी यह सोच कर कि जब यह इलाका इतना बदनाम है, तो देश में प्रसिद्ध कथाकार के रूप में प्रसिद्ध मोरारी बापू यहां क्यों गए थे? दरसल मोरारी बापू कमाठीपुरा में रहने वाली महिलाओं को यह बताने गए थे कि वह सब उनकी बेटियां हैं। देश की वे बेटियां जिनका जिक्र होते ही समाज में अछाई के नाम पर व्यापार करने वाले लोगों की जुबान और मन गंदी और गलीच बातों से भर जाते हैं।       मोरारी बापू अपनी इन्हीं बेटियों को अयोध्या आने का न्योता देने गए थे। न्योता उस कथा को सुनने का जोकि उनके जैसी ही एक महि...

... अभी जारी है राहुल की सियासी जंग!!

आज के समय में कांग्रेस पार्टी का नाम सुनते ही लोगों के जहम में जो पहली तस्वीर उभरती है, वह है राहुल गांधी की। ऐसे इसलिए नहीं कि राहुल गांधी ने जनता के हित में अनेक काम किए हैं, बल्कि इसलिए कि वह हमेशा अटपटे बयान देकर लोगों की चर्चा का विषय बने रहे। राहुल गांधी को कुछ लोग एक मूर्ख नेता के रूप में देखते हैं तो कुछ शायद एक जुझारू शख्सियत के रूप में। वैसे राहुल को जुझारू कहना गलत नहीं होगा, यह काबिलियत तो उन्हें विरासत में मिली है। यह तो सभी जानते हैं कि राहुल गांधी देश के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। गांधी परिवार ने कांग्रेस पार्टी के जरिए लोगों तक पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देश की अॉइरन लेडी के नाम से जानी जाने वाली स्व. इंदिरा गांधी जी ने जिस मुकाम पर कांग्रेस पार्टी को पहुंचाया वह इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।        कांग्रेस को अनोखी पहचान दिलाने के लिए देश की पहली महिला प्रधानमंत्री ने कम संघर्ष नहीं किया। एक समय था जब कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक क्षेत्र में एक ऊंचा स्थान प्राप्त था। इसका सबसे बड़ा कारण था पार्टी के सदस्यों द्वा...

कहां हो रही चूक?

सर्दियां आते ही शुरू हो गया शादियों का सिलसिला।शादी जिसे हमारे देश में सबसे ऊंचा और पवित्र रिश्ता माना जाता है। कहते हैं कि इस बंधन में बंधने वाले लोग सात जन्मों तक एक दूजे के हो जाते हैं। पिछले साल तक मैं भी यही मानती थी कि इस रिश्ते में जुड़ने वाले लोग एक दूसरे के लिए समर्पित रहते हैं। सोचूं भी क्यों न क्योंकि बचपन से मां और पापा हर परिस्थिति में एक दूसरे का लिए साथ निभाते जो देखा है। मां-पापा के बीच का प्यार और उनकी एक दूसरे के प्रति समझ को देख कर कभी सोचा ही नहीं कि यह रिश्ता भी कभी सवालों के घेरे में आ सकता है। पर अब ऐसे कुछ किस्से सुनने में आए हैं जिसके बाद यह सोचना पर मन मजबूर हो उठता है कि क्या वाकई शादी का रिश्ता अटूट होता है? एक किस्से से शुरू करते हैं रिश्तों के डर की कहानी : पिछले साल की बात है, ठीक से तारीख तो नहीं याद पर इतना याद है कि सर्दियों के दिन थे। एक रिश्तेदार की बेटी की शादी थी। मिश्रा जी की बड़ी बेटी नीतू की शादी थी, क्योंकि घर की पहली शादी थी इसलिए इंतजाम भी टॉप क्लास था। बारातियों और रिश्तेदारों के खानपान और रहने तक के इंतजाम में मिश्रा परिवार ने कोई कसर न...

रजस्वलाओं की जंग, रजस्वला खुद करें भंग

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित सबरीमला मंदिर पिछले काफी समय से विवादों में है। विवाद का कारण है मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रवेश करने का आदेश देना। दरसल सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितम्बर को इस मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का आदेश दिया था। इससे पहले इस मंदिर में मासिक धर्म होने वाली स्त्रियों का प्रवेश वर्जित था। हालांकि आदेश के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और धर्म के नाम पर ढोंग करने वाले लोगों ने मासिक धर्म होने वाली महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। मंदिर में जवान स्त्रियों का प्रवेश इसलिए वर्जित है, क्योंकि खुद धर्म का ज्ञाता मानने वालों का कहना है कि मंदिर के स्वामी भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी है, इसलिए मंदिर में रजस्वला (जिन्हें पीरियड्स होते हैं) स्त्रियों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। इन रुढ़ीवादी लोगों से बस कुछ प्रश्न - भगवान के दर्शन करने का रजस्वला होने से क्या नाता है? दूसरा प्रश्न भगवान के ब्रह्मचारी होने से पीरियड्स का क्या संबंध? (ब्रह्मचारी तो मारुति नंदन हनुमान भी हैं। उनके दर्शन और आशिर्वाद के लिए तो बड़े मंगल पर भक्तों की ...

इंसान क्यों बनता जा रहा हैवान?

बिहार के फुलवारीशरीफ इलाके में पिछले दिनों एक पांचवी कक्षा की छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया था। यह मामला तब सामने आया जब बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसके माता - पिता उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने बच्ची की जांच कर बताया कि बच्ची दो महीने की गर्भवती है। जाहिर है कि बच्ची के माता - पिता को एक बार में तो अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ होगा। बच्ची के साथ हुए इस कुकर्म की सूचना के बाद पुलिस ने पड़ताल कर बच्ची के ही स्कूल के प्रिंसिपल और एक शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर बच्ची के साथ करीब नौ महीने तक रेप करने का आरोप है। इस घटना के बाद जो सबसे पहला सवाल खड़ा होता है वह यह है कि क्या अभिभावक अब अपनी बेटियों को शिक्षित करने के लिए स्कूल और कॉलेज भेजना भी बंद कर दें? यह सोच कर भी आत्मा काप उठती है कि जिसे कभी हम अपनी बेटी के गुरु के रूप में देखते थे आज वही उसके साथ हुई दरिंदगी का जिम्मेदार है। यह बड़े ही दुख की बात है कि आज देश के शिक्षा के मंदिर भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रहे। देश की यह स्थिति देखने के बाद यह समझना मुश्किल हो गया है कि हमारा देश आज किस दिशा में जा रहा ह...