Posts

Showing posts with the label बेटा

अनपढ़ है मेरी माँ

Image
अनपढ़ है मेरी माँ, पर समय को पढ़ना जानती है, खराब समय को भी वह अच्छे से गढ़ना जानती है।  मन की टुक-टुक और मस्तिष्क की टिक-टिक को भी पढ़ लेती है। माँ अनपढ़ है मेरी, न जाने ये सब कैसे कर लेती है। वो गणित में मेरा जोड़-घटाना और अंग्रेजी में शब्दों का भूल जाना माँ बखूबी समझती है। खुद अनपढ़ हो कर भी मुझे हर वक्त पढ़ने को कहती है। मेरी परिक्षा की तिथि हो या मेरे किसी ज़रूरी काम की, मुझसे पहले माँ को याद आती है। मेरी माँ अनपढ़ है, फिर भी वह हर तिथि दिमाग में लिख लेती है।  मेरी चिकित्सक, मेरी सलाहकार है, माँ अनपढ़ ज़रूर है मेरी पर उसे पढ़े-लिखों से भी अधिक ज्ञान है।