प्रधानमंत्री जी की 'रेड कार्पेट' वाली तीर्थ यात्रा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उत्तराखंड की दो दिवसीय यात्रा पर केदारनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और इसके बाद वह दो किलोमीटर तक की चढ़ाई करके रुद्र गुफा में पहुंचे। बताया गया कि इस गुफा में प्रधानमंत्री रविवार तक ध्यान लगाएंगे।
वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी का केदारनाथ में यह तीसरा दौरा है, पर मीडिया में पिछले दो दौरों से अधिक चर्चा इस दौरे की हो रही है। जाहिर है कि लोग इसे आने वाले चुनाव परिणाम के लिए की जाने वाली प्रार्थना के रूप में देख रहे होंगे। लोगों का अनुमान भी कहीं न कहीं सही है, मगर क्या वाकई यह सिर्फ प्रार्थना है जो प्रधानमंत्री मोदी को केदारनाथ की गला देने वाली पहाड़ियों तक खींच ले गई। यह प्रश्न किसी के मन में उठे या न उठे, पर मोदी विरोधियों के मन में जरूर उठेगा। और इस बार मेरे मन में भी।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को श्रद्धा न मान कर ढोंग, टीआरपी वाला दौरा और खुद को भगवान शिव का परम भक्त दिखा कर हिंदुओं का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला एक नया कदम मानना मेरे हिसाब से बिल्कुल भी गलत नहीं है। इस बात का प्रमाण खुद नरेंद्र मोदी जी ने दर्शन के समय मीडिया को साथ ले जाकर दे दिया। क्या इससे पहले पीएम मोदी के केदारनाथ दौरे की फोटो और वीडियो सामने आई? यह दर्शाता है कि मोदी राजनीति में जमे रहने के लिए भगवान को भी सफलता की एक सीढ़ी के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।
   वैसे देखा जाए तो मोदी जी ने कहीं न कहीं मीडिया को साथ ले जाकर अच्छा काम भी किया। इससे लोगों ने भी प्रधानमंत्री मोदी की रेड कार्पेट वाली तीर्थ यात्रा के दर्शन कर लिए।अपने इस दौरे पर प्रधानमंत्री ने अपने प्रिय भगवान शिव तक पहुंचने के लिए रेड कार्पेट का सहारा लिया। अब इसे देश के प्रधानमंत्री होने का फायदा कहें या भगवान शिव तक वीआईपी सुविधाओं के साथ पहुंच कर उनका अपमान। यह तो शिव ही जाने....।
वैसे मोदी भक्त इसे ठंड का कारण भी बता सकतें हैं, इसलिए उनसे बस एक ही सवाल है कि क्या ठंड सिर्फ मोदी जी के लिए ही थी, क्या आम जनता पर ठंड का असर नहीं होता है। खैर.....
   अब बात जब मोदी विरोध में हो रही हो तो इसमें कांग्रेस का जिक्र न हो यह तो नाइंसाफी होगी। दरअसल, कांग्रेस ने वाराणसी चुनाव से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री के केदारनाथ पहुंचने पर ऐतराज जताया और इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। कांग्रेस ने इसे वाराणसी के चुनाव प्रचार से जोड़ते हुए कहा कि केदारनाथ का कनेक्शन वाराणसी के बाबा विश्वनाथ मंदिर से है। मामले की शिकायत के लिए कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल शनिवार सुबह ही देहरादून के निर्वाचन कार्यालय पहुंच गया। अब यह आचार संहिता का उल्लंघन है या नहीं, यह तो आयोग ही जाने।
    आज प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत 59 सीटों पर मतदान हैं। उम्मीद करते हैं कि मोदी जी की प्रार्थना सफल हो और इस बार जब वह विजयी होकर आए तो जनता से किए गए वादों को निभाए। साथ ही अपनी इस केदारनाथ यात्रा की तरह आगे पूर्ण होने वाले (सिर्फ कहे जाने वाले) विकास कार्यों में भी मीडिया को जरूर शामिल करें। इससे उनकी सरकार का प्रचार-प्रसार भी आसानी से हो जाएगा, साथ ही "मोदी सरकार में विकास नहीं हुआ" कहने वाले लोगों को भी संतुष्टि मिल जाएगी।
"इस आर्टिकल का उद्देश्य मोदी भक्तों के दिल को चोट पहुंचाना बिल्कुल भी नहीं है।"

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