मैं पागल हूं
मैं पागल हूं, क्योंकि मैं, मैं हूँ।
नहीं भाता मुझे अजनबियों का करीब आना, कुछ अपनों का यूं बे वजह रूठ जाना।
मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता इन रूठे लोगों को मनाना।
नहीं भाता मुझे आंसुओं का यूं लुढ़क जाना, होठों का यूं हर वक्त मुस्कुरा जाना।
मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता अपने गुस्से को छुपाना।
नहीं भाता मुझे रिश्तों का एक पल में बिखर जाना, हमारी हँसी का चंद लम्हो में सिमट कर रह जाना।
मैं पागल ही तो हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता हर स्थिति को सहन कर जाना।
मुझे नहीं भाता सपनो का टूट जाना, योजनाओं का बस एक योजना ही बन कर रह जाना।
मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता अपने सपनो को अधूरा देख पाना।
नहीं भाता मुझे किसी का कुछ भी कह देना, मेरी बातों को बस यूं ही टाल दिया जाना।
मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता हर किसी की सुनकर चुप रह जाना।
वक्त वेवक्त मुस्करा देना ही ,तो हमे हमारे होने का अहसास कराता है ।
ReplyDeleteपर अंदर ही अंदर दर्द भी बहुत देता है
DeleteAwesome di !!!
ReplyDeleteThnq dear 💋💋
DeleteThnq Ashu 😊😊
ReplyDeletePerfect
ReplyDelete😄💖😄
Delete👌👌
ReplyDelete👌👌
ReplyDelete😊😊
Deleteबेहतरीन
ReplyDeleteThanks dear 💓💓
Deleteबेहतरीन
ReplyDeletePerfect lines.. Great👍👏
ReplyDeleteThnq so much 😀😀
DeleteAwesome lines👌
ReplyDeleteThnq 😊😊
DeleteLikhti raho
ReplyDeleteजी ज़रूर 😊😊
Delete👌👌👌👌
ReplyDeleteVery well potrayed.
ReplyDeleteThnq sparsh 😊😊
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