अनपढ़ है मेरी माँ
अनपढ़ है मेरी माँ, पर समय को पढ़ना जानती है, खराब समय को भी वह अच्छे से गढ़ना जानती है।
मन की टुक-टुक और मस्तिष्क की टिक-टिक को भी पढ़ लेती है। माँ अनपढ़ है मेरी, न जाने ये सब कैसे कर लेती है।
वो गणित में मेरा जोड़-घटाना और अंग्रेजी में शब्दों का भूल जाना माँ बखूबी समझती है। खुद अनपढ़ हो कर भी मुझे हर वक्त पढ़ने को कहती है।
मेरी परिक्षा की तिथि हो या मेरे किसी ज़रूरी काम की, मुझसे पहले माँ को याद आती है। मेरी माँ अनपढ़ है, फिर भी वह हर तिथि दिमाग में लिख लेती है।
मेरी चिकित्सक, मेरी सलाहकार है, माँ अनपढ़ ज़रूर है मेरी पर उसे पढ़े-लिखों से भी अधिक ज्ञान है।

Very well written Akansha.Keep it up.
ReplyDeleteThnq so much sparsh💓😊😊💓
DeleteAwesome lines
ReplyDeleteThnq so much 🤗🤗💓💓
Deleteअदभुद लिखती है आप
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद भईया 💓💓
DeleteVery emotional
ReplyDeleteThnq 😊😊
DeleteEmotions floating in words
ReplyDeleteThnq so much vivek 😊😊
Delete👍
ReplyDeleteThnq sir😊
DeleteBeautiful♥️
ReplyDeleteThnq so much dear💓💓🤗🤗💓💓
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