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Showing posts from December, 2018

गणिकाओं के लिए इतना भेदभाव क्यों?

देश के प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू हालही में मुंबई के कमाठीपुरा इलाके पहुंचे। कमाठीपुरा यह मुबंई जैसे खूखसूरत और प्रसिद्ध शहर के सबसे बदनाम इलाकों में से एक है। आम भाषा में इसे लाल बाजार या रेड लाइट एरिया कहते हैं। और आसान शब्दों में कहें तो यह वह इलाका का जहां हर रोज लगभग हर वो काम होता है, जिसे करने की इजाजत हमारा समाज हमें नहीं देता। यह यूं कहें कि जिन्हें करने की इजाजत शरीफ घर के लोगों को नहीं होती।     यह सब सुन कर अखबारों और न्यूज चैनलों से दूर रहने वाले लोगों को अधिक हैरानी होगी। हैरानी यह सोच कर कि जब यह इलाका इतना बदनाम है, तो देश में प्रसिद्ध कथाकार के रूप में प्रसिद्ध मोरारी बापू यहां क्यों गए थे? दरसल मोरारी बापू कमाठीपुरा में रहने वाली महिलाओं को यह बताने गए थे कि वह सब उनकी बेटियां हैं। देश की वे बेटियां जिनका जिक्र होते ही समाज में अछाई के नाम पर व्यापार करने वाले लोगों की जुबान और मन गंदी और गलीच बातों से भर जाते हैं।       मोरारी बापू अपनी इन्हीं बेटियों को अयोध्या आने का न्योता देने गए थे। न्योता उस कथा को सुनने का जोकि उनके जैसी ही एक महि...

... अभी जारी है राहुल की सियासी जंग!!

आज के समय में कांग्रेस पार्टी का नाम सुनते ही लोगों के जहम में जो पहली तस्वीर उभरती है, वह है राहुल गांधी की। ऐसे इसलिए नहीं कि राहुल गांधी ने जनता के हित में अनेक काम किए हैं, बल्कि इसलिए कि वह हमेशा अटपटे बयान देकर लोगों की चर्चा का विषय बने रहे। राहुल गांधी को कुछ लोग एक मूर्ख नेता के रूप में देखते हैं तो कुछ शायद एक जुझारू शख्सियत के रूप में। वैसे राहुल को जुझारू कहना गलत नहीं होगा, यह काबिलियत तो उन्हें विरासत में मिली है। यह तो सभी जानते हैं कि राहुल गांधी देश के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। गांधी परिवार ने कांग्रेस पार्टी के जरिए लोगों तक पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देश की अॉइरन लेडी के नाम से जानी जाने वाली स्व. इंदिरा गांधी जी ने जिस मुकाम पर कांग्रेस पार्टी को पहुंचाया वह इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।        कांग्रेस को अनोखी पहचान दिलाने के लिए देश की पहली महिला प्रधानमंत्री ने कम संघर्ष नहीं किया। एक समय था जब कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक क्षेत्र में एक ऊंचा स्थान प्राप्त था। इसका सबसे बड़ा कारण था पार्टी के सदस्यों द्वा...

कहां हो रही चूक?

सर्दियां आते ही शुरू हो गया शादियों का सिलसिला।शादी जिसे हमारे देश में सबसे ऊंचा और पवित्र रिश्ता माना जाता है। कहते हैं कि इस बंधन में बंधने वाले लोग सात जन्मों तक एक दूजे के हो जाते हैं। पिछले साल तक मैं भी यही मानती थी कि इस रिश्ते में जुड़ने वाले लोग एक दूसरे के लिए समर्पित रहते हैं। सोचूं भी क्यों न क्योंकि बचपन से मां और पापा हर परिस्थिति में एक दूसरे का लिए साथ निभाते जो देखा है। मां-पापा के बीच का प्यार और उनकी एक दूसरे के प्रति समझ को देख कर कभी सोचा ही नहीं कि यह रिश्ता भी कभी सवालों के घेरे में आ सकता है। पर अब ऐसे कुछ किस्से सुनने में आए हैं जिसके बाद यह सोचना पर मन मजबूर हो उठता है कि क्या वाकई शादी का रिश्ता अटूट होता है? एक किस्से से शुरू करते हैं रिश्तों के डर की कहानी : पिछले साल की बात है, ठीक से तारीख तो नहीं याद पर इतना याद है कि सर्दियों के दिन थे। एक रिश्तेदार की बेटी की शादी थी। मिश्रा जी की बड़ी बेटी नीतू की शादी थी, क्योंकि घर की पहली शादी थी इसलिए इंतजाम भी टॉप क्लास था। बारातियों और रिश्तेदारों के खानपान और रहने तक के इंतजाम में मिश्रा परिवार ने कोई कसर न...