इंसान क्यों बनता जा रहा हैवान?
बिहार के फुलवारीशरीफ इलाके में पिछले दिनों एक पांचवी कक्षा की छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया था। यह मामला तब सामने आया जब बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसके माता - पिता उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने बच्ची की जांच कर बताया कि बच्ची दो महीने की गर्भवती है। जाहिर है कि बच्ची के माता - पिता को एक बार में तो अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ होगा। बच्ची के साथ हुए इस कुकर्म की सूचना के बाद पुलिस ने पड़ताल कर बच्ची के ही स्कूल के प्रिंसिपल और एक शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर बच्ची के साथ करीब नौ महीने तक रेप करने का आरोप है। इस घटना के बाद जो सबसे पहला सवाल खड़ा होता है वह यह है कि क्या अभिभावक अब अपनी बेटियों को शिक्षित करने के लिए स्कूल और कॉलेज भेजना भी बंद कर दें? यह सोच कर भी आत्मा काप उठती है कि जिसे कभी हम अपनी बेटी के गुरु के रूप में देखते थे आज वही उसके साथ हुई दरिंदगी का जिम्मेदार है। यह बड़े ही दुख की बात है कि आज देश के शिक्षा के मंदिर भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रहे।
देश की यह स्थिति देखने के बाद यह समझना मुश्किल हो गया है कि हमारा देश आज किस दिशा में जा रहा है। यह बड़े ही दुर्भाग्यकी बात है कि भारत में हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें किसी और की करनी की सजा एक मासूम को भुगतनी पड़ती है। और एक 10 - 11 साल की बच्ची को गर्भवतियों की श्रेणी में ला कर खड़ी कर दी जाती है। एक बच्ची जिसे गर्भवती शब्द का मतलब भी नहीं पता। वह आज गर्भवती है और अब न चाहते हुए भी उस मासूम को उस दर्द से गुजरना पड़ेगा, जिसे सहने के लिए उसका शरीर अभी तैयार ही नहीं है।
बच्चियों और महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म के मामले आज जिस प्रकार से बढ़ रहे हैं, उसे देखकर यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि हमारे समाज के कुछ पुरुषों में इंसानियत खत्म हो चुकी है। उनकी सोच इस हद तक घिनौनी हो चुकी है कि उन्हें अपनी बेटी या उससे भी छोटी उम्र की लड़की के साथ हैवानियत करने में जरा भी शर्म नहीं आती। आज देश की हर वो मां अधिक चिंतित है, जिसकी बच्ची नाबालिग है। उसके मन में यह चिंता इस बात की है कि कैसे अपनी बच्ची को रेप का अर्थ समझाएं, कैसे उसे समाज में आस पास घूम रहे हैवानों की पहचान करना सिखाएं। क्योंकि लाड प्यार से पली इन बच्चियों ने तो बस आज तक ममता की छाया में ही जीवन बिताया है। उन्हें तो समाज में इंसान के रूप में बैठे उन दरिंदों के बारे में खबर ही नहीं, जिन्होंने अपनी घिनौनी मंशा के चलते नवजात बच्चियों तक को नहीं छोड़ा।
साल 2016 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करीब 11 हजार नाबालिग लड़कियों के साथ रेप किया जाता है। देश में रेप के हर दिन बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए लोग सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे लोगों से बस एक ही सवाल है कि अगर सरकार रेप जैसे अपराध को अंजाम देने वालों को फांसी दे भी देती है, तो क्या देश से रेप के मामले कम हो जाएंगे? इस सवाल का जवाब हमें तब ही मिल पाएगा जब हम अपनों से इस सम्वेदनशील मुद्दे पर खुल कर बात करेंगे। समाज में फैली इस गंदगी को मिटाने के लिए हमें अपने से जुड़े हर उस शख्स से बात करनी होगी जो हमसे किसी न किसी रूप से जुड़ा है, चाहे वह महिला हो या पुरुष। बात कर ही हर समस्या का हल निकाला जा सकता है, इसके बिना कुछ भी मुमकिन नहीं है। देश का हर बच्चा अपने अपनों के लिए संस्कारी है फिर भी देश में अपराधों की संख्या कम नहीं हो रही है, ऐसा क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर हमें मिल कर तलाशना होगा।
देश की यह स्थिति देखने के बाद यह समझना मुश्किल हो गया है कि हमारा देश आज किस दिशा में जा रहा है। यह बड़े ही दुर्भाग्यकी बात है कि भारत में हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें किसी और की करनी की सजा एक मासूम को भुगतनी पड़ती है। और एक 10 - 11 साल की बच्ची को गर्भवतियों की श्रेणी में ला कर खड़ी कर दी जाती है। एक बच्ची जिसे गर्भवती शब्द का मतलब भी नहीं पता। वह आज गर्भवती है और अब न चाहते हुए भी उस मासूम को उस दर्द से गुजरना पड़ेगा, जिसे सहने के लिए उसका शरीर अभी तैयार ही नहीं है।
बच्चियों और महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म के मामले आज जिस प्रकार से बढ़ रहे हैं, उसे देखकर यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि हमारे समाज के कुछ पुरुषों में इंसानियत खत्म हो चुकी है। उनकी सोच इस हद तक घिनौनी हो चुकी है कि उन्हें अपनी बेटी या उससे भी छोटी उम्र की लड़की के साथ हैवानियत करने में जरा भी शर्म नहीं आती। आज देश की हर वो मां अधिक चिंतित है, जिसकी बच्ची नाबालिग है। उसके मन में यह चिंता इस बात की है कि कैसे अपनी बच्ची को रेप का अर्थ समझाएं, कैसे उसे समाज में आस पास घूम रहे हैवानों की पहचान करना सिखाएं। क्योंकि लाड प्यार से पली इन बच्चियों ने तो बस आज तक ममता की छाया में ही जीवन बिताया है। उन्हें तो समाज में इंसान के रूप में बैठे उन दरिंदों के बारे में खबर ही नहीं, जिन्होंने अपनी घिनौनी मंशा के चलते नवजात बच्चियों तक को नहीं छोड़ा।
साल 2016 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल करीब 11 हजार नाबालिग लड़कियों के साथ रेप किया जाता है। देश में रेप के हर दिन बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए लोग सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे लोगों से बस एक ही सवाल है कि अगर सरकार रेप जैसे अपराध को अंजाम देने वालों को फांसी दे भी देती है, तो क्या देश से रेप के मामले कम हो जाएंगे? इस सवाल का जवाब हमें तब ही मिल पाएगा जब हम अपनों से इस सम्वेदनशील मुद्दे पर खुल कर बात करेंगे। समाज में फैली इस गंदगी को मिटाने के लिए हमें अपने से जुड़े हर उस शख्स से बात करनी होगी जो हमसे किसी न किसी रूप से जुड़ा है, चाहे वह महिला हो या पुरुष। बात कर ही हर समस्या का हल निकाला जा सकता है, इसके बिना कुछ भी मुमकिन नहीं है। देश का हर बच्चा अपने अपनों के लिए संस्कारी है फिर भी देश में अपराधों की संख्या कम नहीं हो रही है, ऐसा क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर हमें मिल कर तलाशना होगा।
👌👌
ReplyDeleteOutrageous outpouring of thoughts on the incidents where the guy stooped to the minimal level of humanity.
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