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Showing posts from 2018

गणिकाओं के लिए इतना भेदभाव क्यों?

देश के प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू हालही में मुंबई के कमाठीपुरा इलाके पहुंचे। कमाठीपुरा यह मुबंई जैसे खूखसूरत और प्रसिद्ध शहर के सबसे बदनाम इलाकों में से एक है। आम भाषा में इसे लाल बाजार या रेड लाइट एरिया कहते हैं। और आसान शब्दों में कहें तो यह वह इलाका का जहां हर रोज लगभग हर वो काम होता है, जिसे करने की इजाजत हमारा समाज हमें नहीं देता। यह यूं कहें कि जिन्हें करने की इजाजत शरीफ घर के लोगों को नहीं होती।     यह सब सुन कर अखबारों और न्यूज चैनलों से दूर रहने वाले लोगों को अधिक हैरानी होगी। हैरानी यह सोच कर कि जब यह इलाका इतना बदनाम है, तो देश में प्रसिद्ध कथाकार के रूप में प्रसिद्ध मोरारी बापू यहां क्यों गए थे? दरसल मोरारी बापू कमाठीपुरा में रहने वाली महिलाओं को यह बताने गए थे कि वह सब उनकी बेटियां हैं। देश की वे बेटियां जिनका जिक्र होते ही समाज में अछाई के नाम पर व्यापार करने वाले लोगों की जुबान और मन गंदी और गलीच बातों से भर जाते हैं।       मोरारी बापू अपनी इन्हीं बेटियों को अयोध्या आने का न्योता देने गए थे। न्योता उस कथा को सुनने का जोकि उनके जैसी ही एक महि...

... अभी जारी है राहुल की सियासी जंग!!

आज के समय में कांग्रेस पार्टी का नाम सुनते ही लोगों के जहम में जो पहली तस्वीर उभरती है, वह है राहुल गांधी की। ऐसे इसलिए नहीं कि राहुल गांधी ने जनता के हित में अनेक काम किए हैं, बल्कि इसलिए कि वह हमेशा अटपटे बयान देकर लोगों की चर्चा का विषय बने रहे। राहुल गांधी को कुछ लोग एक मूर्ख नेता के रूप में देखते हैं तो कुछ शायद एक जुझारू शख्सियत के रूप में। वैसे राहुल को जुझारू कहना गलत नहीं होगा, यह काबिलियत तो उन्हें विरासत में मिली है। यह तो सभी जानते हैं कि राहुल गांधी देश के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। गांधी परिवार ने कांग्रेस पार्टी के जरिए लोगों तक पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देश की अॉइरन लेडी के नाम से जानी जाने वाली स्व. इंदिरा गांधी जी ने जिस मुकाम पर कांग्रेस पार्टी को पहुंचाया वह इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।        कांग्रेस को अनोखी पहचान दिलाने के लिए देश की पहली महिला प्रधानमंत्री ने कम संघर्ष नहीं किया। एक समय था जब कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक क्षेत्र में एक ऊंचा स्थान प्राप्त था। इसका सबसे बड़ा कारण था पार्टी के सदस्यों द्वा...

कहां हो रही चूक?

सर्दियां आते ही शुरू हो गया शादियों का सिलसिला।शादी जिसे हमारे देश में सबसे ऊंचा और पवित्र रिश्ता माना जाता है। कहते हैं कि इस बंधन में बंधने वाले लोग सात जन्मों तक एक दूजे के हो जाते हैं। पिछले साल तक मैं भी यही मानती थी कि इस रिश्ते में जुड़ने वाले लोग एक दूसरे के लिए समर्पित रहते हैं। सोचूं भी क्यों न क्योंकि बचपन से मां और पापा हर परिस्थिति में एक दूसरे का लिए साथ निभाते जो देखा है। मां-पापा के बीच का प्यार और उनकी एक दूसरे के प्रति समझ को देख कर कभी सोचा ही नहीं कि यह रिश्ता भी कभी सवालों के घेरे में आ सकता है। पर अब ऐसे कुछ किस्से सुनने में आए हैं जिसके बाद यह सोचना पर मन मजबूर हो उठता है कि क्या वाकई शादी का रिश्ता अटूट होता है? एक किस्से से शुरू करते हैं रिश्तों के डर की कहानी : पिछले साल की बात है, ठीक से तारीख तो नहीं याद पर इतना याद है कि सर्दियों के दिन थे। एक रिश्तेदार की बेटी की शादी थी। मिश्रा जी की बड़ी बेटी नीतू की शादी थी, क्योंकि घर की पहली शादी थी इसलिए इंतजाम भी टॉप क्लास था। बारातियों और रिश्तेदारों के खानपान और रहने तक के इंतजाम में मिश्रा परिवार ने कोई कसर न...

रजस्वलाओं की जंग, रजस्वला खुद करें भंग

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित सबरीमला मंदिर पिछले काफी समय से विवादों में है। विवाद का कारण है मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रवेश करने का आदेश देना। दरसल सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितम्बर को इस मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का आदेश दिया था। इससे पहले इस मंदिर में मासिक धर्म होने वाली स्त्रियों का प्रवेश वर्जित था। हालांकि आदेश के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और धर्म के नाम पर ढोंग करने वाले लोगों ने मासिक धर्म होने वाली महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। मंदिर में जवान स्त्रियों का प्रवेश इसलिए वर्जित है, क्योंकि खुद धर्म का ज्ञाता मानने वालों का कहना है कि मंदिर के स्वामी भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी है, इसलिए मंदिर में रजस्वला (जिन्हें पीरियड्स होते हैं) स्त्रियों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। इन रुढ़ीवादी लोगों से बस कुछ प्रश्न - भगवान के दर्शन करने का रजस्वला होने से क्या नाता है? दूसरा प्रश्न भगवान के ब्रह्मचारी होने से पीरियड्स का क्या संबंध? (ब्रह्मचारी तो मारुति नंदन हनुमान भी हैं। उनके दर्शन और आशिर्वाद के लिए तो बड़े मंगल पर भक्तों की ...

इंसान क्यों बनता जा रहा हैवान?

बिहार के फुलवारीशरीफ इलाके में पिछले दिनों एक पांचवी कक्षा की छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया था। यह मामला तब सामने आया जब बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसके माता - पिता उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने बच्ची की जांच कर बताया कि बच्ची दो महीने की गर्भवती है। जाहिर है कि बच्ची के माता - पिता को एक बार में तो अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ होगा। बच्ची के साथ हुए इस कुकर्म की सूचना के बाद पुलिस ने पड़ताल कर बच्ची के ही स्कूल के प्रिंसिपल और एक शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर बच्ची के साथ करीब नौ महीने तक रेप करने का आरोप है। इस घटना के बाद जो सबसे पहला सवाल खड़ा होता है वह यह है कि क्या अभिभावक अब अपनी बेटियों को शिक्षित करने के लिए स्कूल और कॉलेज भेजना भी बंद कर दें? यह सोच कर भी आत्मा काप उठती है कि जिसे कभी हम अपनी बेटी के गुरु के रूप में देखते थे आज वही उसके साथ हुई दरिंदगी का जिम्मेदार है। यह बड़े ही दुख की बात है कि आज देश के शिक्षा के मंदिर भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं रहे। देश की यह स्थिति देखने के बाद यह समझना मुश्किल हो गया है कि हमारा देश आज किस दिशा में जा रहा ह...

पहल

सपनों को सवारता सार्थक फाउंडेशन शिक्षा हर बच्चे का मूल अधिकार है। इस बात की अहमियत को समझते हुए आज शहर में कई ऐसे एनजीओ चल रहे हैं जो गरीबी की मार झेल रहे बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं। सार्थक फाउंडेशन एक ऐसा ही एनजीओ है जो गरीब बच्चों को पढ़ा कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बनाता है। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ एक्स्ट्ररा करीकुलर एक्टीवीटीज में भाग लेने का मौका भी दिया जाता है। बीटेक के पूर्व छात्रों और टीचर ने रखी नीव- इस फाउंडेशन की नीव साल 2013 में ऐमिटी यूनिवर्सिटी से बीटेक कर चुके सुबेन्द्रू पाण्डे ने अपने दोस्तों (मानस मेहरोत्रा, रश्मी शुक्ला, मनु आकाश, श्वेता सिंह, पल्लवी पिल्लई) और टीचर समा हसतक के साथ मिल कर रखी थी। सुबेन्द्रू के लिए यह सफर आसान नहीं था। वह बताते हैं कि बीटेक की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके माता-पिता का भी सपना था की उनका बेटा एक अच्छी नौकरी करके आराम की जिन्दगी जिए, पर उन्हें यह कॉमन लाइफ जीना गवारा नहीं था। वह लीग से हटकर और चुनौती पूर्ण करना चाहते थे। कैसे की पहल- कॉलेज के दिनों में जब सुबेन्द्रु गरीब बच्चों को इधर-उधर घूमते फिरते और भ...