Posts

Showing posts from September, 2020

मैं पागल हूं

मैं पागल हूं, क्योंकि मैं, मैं हूँ। नहीं भाता मुझे अजनबियों का करीब आना, कुछ अपनों का यूं बे वजह रूठ जाना।  मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता इन रूठे लोगों को मनाना।  नहीं भाता मुझे आंसुओं का यूं लुढ़क जाना, होठों का यूं हर वक्त मुस्कुरा जाना।  मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता अपने गुस्से को छुपाना।  नहीं भाता मुझे रिश्तों का एक पल में बिखर जाना, हमारी हँसी का चंद लम्हो में सिमट कर रह जाना।  मैं पागल ही तो हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता हर स्थिति को सहन कर जाना। मुझे नहीं भाता सपनो का टूट जाना, योजनाओं का बस एक योजना ही बन कर रह जाना। मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता अपने सपनो को अधूरा देख पाना।  नहीं भाता मुझे किसी का कुछ भी कह देना, मेरी बातों को बस यूं ही टाल दिया जाना।  मैं पागल हूं, क्योंकि मुझे नहीं आता हर किसी की सुनकर चुप रह जाना।