दिल से, दिल को
हमारी शुरुआत ही खटास के साथ हुई, इसलिए मैंने तुमसे मिठास की उम्मीद ही न की। फिर भी जाने अनजाने तुमने मुझे कई बार हंसाया और इसी तरह तुमने मेरा हर दिन बनाया। कई अहम सबक भी सिखाए हैं तुमने, पहले से अधिक द्रढ़ बनाया और इसी तरह तुम रहे हमेशा बनकर मेरा साया। पहली मुलाकात में ही चिढ़ गई थी तुमसे, फिर भी तुमने मेरे साथ ही हर कदम बढ़ाया। मेरे सही, गलत और सही करने के बाद गलत फैसले लेने को भी तुमने सराहा और इस तरह तुमने मेरे मुताबिक ही माहौल बना डाला। एक दिन सोचा कि क्या सही थी हमारी शुरुआत, क्यों नहीं की मैने तुमसे कभी कोई बात? वैसे अब तो कभी न मिलेगा मुझे तुम्हारा साथ और न ही आओगे तुम फिर कभी थामने मेरा हाथ, रोक भी नहीं सकतें तुम्हें, न ही पलट सकतें हैं हम घड़ी का कांटा, इसलिए दिल से कह रहे हैं तुम्हें टाटा। अलविदा 2019...!