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दिल से, दिल को

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हमारी शुरुआत ही खटास के साथ हुई, इसलिए मैंने तुमसे मिठास की उम्मीद ही न की। फिर भी जाने अनजाने तुमने मुझे कई बार हंसाया और इसी तरह तुमने मेरा हर दिन बनाया। कई अहम सबक भी सिखाए हैं तुमने, पहले से अधिक द्रढ़ बनाया और इसी तरह तुम रहे हमेशा बनकर मेरा साया। पहली मुलाकात में ही चिढ़ गई थी तुमसे, फिर भी तुमने मेरे साथ ही हर कदम बढ़ाया। मेरे सही, गलत और सही करने के बाद गलत फैसले लेने को भी तुमने सराहा और इस तरह तुमने मेरे मुताबिक ही माहौल बना डाला। एक दिन सोचा कि क्या सही थी हमारी शुरुआत, क्यों नहीं की मैने तुमसे कभी कोई बात? वैसे अब तो कभी न मिलेगा मुझे तुम्हारा साथ और न ही आओगे तुम फिर कभी थामने मेरा हाथ, रोक भी नहीं सकतें तुम्हें, न ही पलट सकतें हैं हम घड़ी का कांटा, इसलिए दिल से कह रहे हैं तुम्हें टाटा।  अलविदा 2019...!

आकांक्षा

शुरू से शुरू करूं तो शायद शुरू ही न कर पाऊं, ये मेरे दिल का हाल है... मैं खुद इसे दुनिया से रुबरू ही न करा पाऊं। देखे थे जो ख्वाब अनेक अब तो वो यादों में बस गए, जिन गुलाब का गुलदस्ता बनाने की सोची थी, वो तो पहली पतझड़ में ही झड़ गए। प्लान 'ए' के बनते ही प्लान 'बी' और 'सी' भी बना लिया करती थी... प्लान 'ए' के टूटते ही 'बी' और 'सी' तो किसी अंजान बस्ते में गुम गए। हुई थी निराश अपने आप से, फटकारा भी था खुद को जरा सा, अपनों और सपनों के बीच, हो गई थी अकेली मानों हो एक पहेली। मन था उदास, मस्तिष्क था निराश... लगने लगा था ये जहां खाली-खाली, क्योंकि पाल ली थी मैंने मन में हारी एक नारी। हां भूल गई थी मैं कि ये नारी ही है जो कभी नहीं है हारी। आज फिर से जनूगी एक आकांक्षा के साथ नई आकांक्षा, प्लान 'ए' के साथ प्लान 'बी' और 'सी' फिर से बनाऊंगी... इसके बाद ही अपने दिल का हाल दुनिया को सुनाऊंगी।